
कान्हा से बांधवगढ़ जाएंगे 30 गौर, विस्थापन में होगा नई तकनीकि का उपयोग
टेÑनिंग लेने जिमबांवे जाएगी टीम
साउथ अफ्रीका से आएगा दल
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कान्हा नेशनल पार्क का ‘मिशन बायसन’ अब मार्च के पहले सप्ताह में शुरु होगा। जिसके तहत बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 30 बासयन (गौर) भेजे जाएंगे। इस बार विस्थापन प्रक्रिया में नई तकनीकि का उपयोग भी किया जाएगा, जिसके लिए कान्हा की टीम टेÑनिंग लेने के लिए फरवरी में जिमबांवे रवाना हो रही है। टीम 7 से 22 फरवरी तक प्रशिक्षण प्राप्त करेगी, इसके बाद बायसनों को ट्रांसलोकेट करने की कार्रवाई शुरु की जाएगी।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ट्रांसलोकेशन से पहले बांधवगढ़ पार्क का तकनीकी और बायसनों के प्राकृतिक स्वभाव को ध्यान में रखते हुए शोध किया जाएगा। इस दौरान पाई जाने वाली खामियों को दूर करने के बाद ही विस्थापन की प्रक्रिया शुरु की जाएगी। ट्रांसलोकेशन की कार्रवाई में साउथ अफ्रीका के वन्यजीव विशेषज्ञ, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून और वेटरनरी के डॉक्टरों की मदद ली जाएगी। मालूम हो कि कान्हा में काले हिरणों की मौत के बाद बायसन को भेजने पर रोक लगा दी गई थी।
वाइल्ड लाइफ कैप्चर कोर्स-
कान्हा के डिप्टी डायरेक्टर हरिशंकर मोहंता और डॉ संदीप अग्रवाल जिमबांवे में वाइल्ड लाइफ कैप्चर कोर्स की टेÑनिंग लेंगे। यह इस दौरान उन्हें सभी वन्यप्राणियों को पकड़ने के गुर सिखाए जाएंगे, जो बायसन विस्थापन सहित दूसरे वन्यजीवों को ट्रांसलोकेशन करने में मददगार साबित होगा।
बेहतर है स्थिति-
इधर बांधवगढ़ पार्क प्रबंधन का कहना है कि यहां के सभी बायसनों की स्थिति बेहतर है। यहां पिछले साल कान्हा नेशनल पार्क से 20 बायसन लाए गए थे, जिसमें से 3 बायसनों की विभिन्न कारणों से मौत हुई थी। प्राकृतिक वातावरण और उचित अबोहवा में ढल चुके सभी बायसन स्वच्छन्द विचरण कर रहे हैं।
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बायसनों को विस्थापित करने से पहले पूरी प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। जिसके लिए सभी तैयारी चल रही है। हम फरवरी के बाद बांधवगढ़ में बायसन भेजने की कार्रवाई शुरु करेंगे।
एचएस मोहंता, उपसंचालक, कान्हा
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