बुधवार, 6 अक्टूबर 2010

गुरु बना जल्लाद





-न्यू मॉडर्न स्कूल धनपुरी का मामला
-पुलिस कर रही मामले की जांच
-आरटीई के खिलाफ है सजा
जबलपुर(...धनपुरी स्थित न्यू मॉडर्न स्कूल के टीचर (जो संचालक भी हैं) की बर्बरता पूर्ण सजा से स्कूल के सभी बच्चे सहमे हुए हैं। कॉपी कंपलीट न करने पर घुटने के बल चलाने से जो हालत दो विद्यार्थियों की हुई है, वह रोंगटे खड़े करने वाली है। इस अमानवीय, निर्दयतापूर्ण प्रताड़ना से अभिभावकों में जबरदस्त आक्रोश है। बच्ची का जख्म देख हर माता और पिता का दिल दुखी हो गया। यही कारण रहा कि चौथी कक्षा की छात्रा शांति बर्मन का पिता इंद्रकुमार अपनी नन्हीं सी जान के कोमल पैर पर घाव देख द्रवित हो गया और उसने ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुलिस में शिकायत कर दी। सजा पाने वाली शांति अकेली न थी। इसी कक्षा का आठ वर्षीय छात्र सागर मरावी के पैर की हालत भी ऐसी है। पीपुल्स समाचार की टीम ने जब बच्चों का हाल जाना तो वह उठ कर चोट दिखाते हुए कहने लगा कि... मुझे भी घुटना टेक कराया गया था।
शिक्षा के अधिकार अधिनियम के खिलाफ दी गई इस प्रकार की सजा से स्कूल के पूरे 110 छात्र-छात्राएं अब घुटना टेक का नाम सुनते ही कांप जाते हैं। हालांकि इस मामले की जांच पुलिस कर रही है। वहीँ जिला शिक्षा अधिकारी संतोष त्रिपाठी ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा है .

ये था मामला :
पिछले बुधवार को तिमाही परीक्षा का मूल्यांकन करते समय संचालक विनोद चौबे को शिक्षिका ने बताया कि चौथी कक्षा के तीन बच्चों ने गणित और हिंदी का काम पूरा नहीं किया है। इस पर श्री चौबे ने तीनों बच्चों को स्कूल परिसर में घुटने के बल चलने की सजा दी। इस दौरान बच्चों के नाजुक पैर छलनी हो गए। छात्रा ने बताया कि उसे काफी देर तक घुटना टेक कराया गया था।

संचालक की सफाई...
इस मामले में विनोद चौबे का कहना था कि उनका उद्देश्य सिर्फ बच्चों की शिक्षा में गुणवत्ता लाने का था। किसी प्रकार से बच्चों को शारीरिक या मानसिक कष्ट पहुंचाना नहीं था। छात्रा के घुटने में चोट पहले से लगी थी और स्लैक्स पहनने के कारण समझ में नहीं आया, लेकिन पता चलते ही उसे वापस बुला कर इलाज कराया गया। कुछ विरोधी स्कूल को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

सबक के लिए शिकायत...
शांति के पिता इंद्र कुमार ने कहा कि मेरे तीन बच्चे न्यू मॉडर्न स्कूल में पढ़ते हैं। किसी बच्चे को दोबारा ऐसी सजा न दी जाए। इसलिए मैंने थाने में शिकायत की है। स्कूल में पढ़ाई बेहतर होती है और मैं चाहता हूं कि संचालक को इसका दंड मिले, परंतु यदि स्कूल बंद होने जैसी कोई बात आती है तो हम शिकायत वापस ले लेंगे।

क्या कहती हैं छात्रा-
होम वर्क पूरा नहीं होने पर पिटाई की जाती है। घुटना टेक कराया जाता है। मम्मी पापा से बताने पर पढ़ाई नहीं करने की बात कही जाती है।
-सोनाली दुबे, छात्रा,
मैदान में घुटने के बल चलाया गया और छड़ी से भी मारा गया। मैडम अच्छा पढ़ाती हैं पर मारती भी है। पापा को स्कूल बुलाकर शिकायत की जाती है।
दीपांशी योगी, छात्रा

2 टिप्‍पणियां:

Dr.Dayaram Aalok ने कहा…

विचारणीय तथ्य। शुभकामनाएं!

Kavyadhara ने कहा…

घर से निकलो तो ज़माने से छुपा कर निकलो ,
आहट हो ना ज़रा भी पावँ दबा कर निकलो.

लौट आयें ये खुदा फिर से वापस घर में
कही चलने से पहले अब ये दुआ कर निकलो .

राहें मकतल बनी हैं , तू बेकफ़न न रह जाए
इसलिए हाथ पे पता घर का लिखा कर निकलो .

अपने ही खून के हाथों में हैं खंज़र इसलिए
रोएगा कौन तुझ पे ,खुद को रूला कर निकलो .

ये दौर खून का हैं हवाओं में बह रहे नश्तर
घर के हर शख्स को सीने से लगा कर निकलो

कवि दीपक शर्मा

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